तुम, सिर्फ तुम -
तुम, सिर्फ तुम -
मेरी सुबह का पहला ख़याल हो तुम,
मेरे हर सवाल का जवाब हो तुम।
चाँद हो तुम मेरी तन्हा रातों का,
मेरी ज़िंदगी का हसीन ख़्वाब हो तुम।
तुम्हें देखूँ तो तुम हो समंदर,
तुम्हें छू लूँ तो आग हो तुम।
हमें कुछ इस तरह याद हो तुम,
जैसे मोहब्बत की कोई किताब हो तुम।
बर्बाद हूँ मैं तेरी मोहब्बत में,
और मेरे अंदर आबाद हो तुम।
तुम्हें पता है ना, मेरी जान जाती है यार,
फिर भी मुझसे नाराज़ हो तुम।

