STORYMIRROR

Rakesh Soni

Inspirational

4  

Rakesh Soni

Inspirational

सुर्खियां..

सुर्खियां..

1 min
314

सुर्खियां बटोर कर भी तो 

मगरूरियत के पंख लग जाने हैं 

जमीं के बुने ख़्वाब 

आकाश में उड़ जाने हैं


यूँ तो जमीं से रिश्ता पुराना है 

और आसमा ख़ुदा का ठिकाना है 

फिर फ़लक पर श्मशान भी नहीं 

लौटकर जमीं पर ही आना है 


तो अपनी जमीं से रिश्ता क्यूँ तोड़ दूँ मैं 

जिनके सहारे हूं उनसे मुँह क्यूँ मोड़ लूँ मैं 

जानता हूँ एक ना एक दिन 

कुछ शौहरत कमानी है 


मगर जब तलक पहचान बनेगी 

अपनी तो गुजर जानी है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational