संघर्ष से सृजन तक: एक नयी उड़ान"
संघर्ष से सृजन तक: एक नयी उड़ान"
राहें कठिन, पर हौसला अडिग,
संघर्ष में दिखा साहस का बिगुल।
पथरीली राहों पे कदम बढ़ाए,
हर दर्द को अपने सीने लगाए।
हारी नहीं, जो झेली थी चोट,
दर्द में भी जीती उम्मीद की लौट।
न तूफानों से, न अपनों की कमी से,
अकेले चल पड़े फिर नयी रौशनी से।
सपने बुनें फिर से इस दिल ने,
शोध-पत्रों में दिखाया साहस जिसने।
सर्जरी की रात हो या दर्द का पहर,
संघर्ष में ही पाया जीवन का रहबर।
हर गिरावट एक सीख थी नयी,
रास्ते में चुन लीं उम्मीदें सभी।
अब आसमां बुलाता, नयी उड़ान है,
तूफान के बाद का ये नया जहान है।
