सखी मनवा हुआ फागुन
सखी मनवा हुआ फागुन
धरती धानी , पीली सरसो ,मुदित जन-मन...
उमंगों के तोरण से सजे है हर घर द्वार ...
सखी मनवा हुआ फागुन ....,,,
गावत कोयल , विहँसित पुष्प , बंसती मधुवन ....
संदली उम्मीदों से हो रहा जीवन का सजीला श्रृगांर ......
सखी मनवा हुआ फागुन.....
मन का आकाश , भावों के रंग , छलकाते अनुराग नयन .....
झरते प्रेम परागों से मचलती फागुनी बयार ,....
सखी मनवा हुआ फागुन ....
प्रेम राग का बजाया मृंदग , मुस्कराया चित्त का दर्पण ....
अंहकार की होलिका जला जीत लिया संसार ......
सखी मनवा हुआ फागुन ......
नेह नदी में डुबकी लगा रोम रोम हुआ रंगीन....
प्रीत रंग गुलाल से मन को रंग , पाया जीवन सार.....
सखी मनवा हुआ फागुन ....
विषय विकार के मैल हटा , पहन नवल चेतना के परिधान .....
जीवन को बना उत्सव ,कर ह्रदय का ह्रदय से मिलन सत्कार ...
सखी मनवा हुआ फागुन ....
