राह-ए-ज़िन्दगी
राह-ए-ज़िन्दगी
खुदा ना करे वो मिले हमे कभी किसी मोड़ पर
क्यूंकि अक्सर मोड़ पर रास्ते बदल जाते हैं
कुछ रास्ते सीधे सीधे निकल जाते हैं
कुछ रास्ते ख़तम हो जाते हैं
देते हैं कुछ ढेर सारी खुशियां
और कुछ ज़िंदगी भर का गम दे जाते हैं
गम तो बहुत मिला है इन राहों पर
फिर भी हम इन पर चलना पसंद करते हैं
मिलते हैं इन राहों में नये नये लोग
जिनमे से कुछ अनदेखा कर जाते हैं
कुछ मिलते हैं चंद लम्हो के लिए
और हमेशा के लिए यादों में बस जाते हैं
कुछ थाम लेते हैं हमारा हाथ
और हमारे साथ सेर पर निकल जाते हैं
लड़ते हैं ज़िंदगी की कठिनाइयों से
और हर बार दोस्त होने का हक़ जता जाते हैं
कुछ हमसे दिल लगा बैठते हैं
कुछ दिल तोड़ कर चले जाते हैं
फिर कभी रस्ते बदल जाते हैं
या फिर कभी नये मोड़ आ जाते हैं।
