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Sanjay Ronghe

Abstract Inspirational

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Sanjay Ronghe

Abstract Inspirational

प्यार

प्यार

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माँ कैसे भूल जाऊँ

मेरे लिये तेरा प्यार।


मैं तो हूँ बहता पानी

और तू नदी की धार।


सूखे ना कभी 

ना रुके तू कभी।


बस सोचती हो लगे

नैय्या मेरी पार।


माँ कैसे भूल जाऊँ

मेरे लिये तेरा प्यार।



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