STORYMIRROR

Sanjay Ronghe

Abstract Inspirational

3  

Sanjay Ronghe

Abstract Inspirational

प्यार

प्यार

1 min
113

माँ कैसे भूल जाऊँ

मेरे लिये तेरा प्यार।


मैं तो हूँ बहता पानी

और तू नदी की धार।


सूखे ना कभी 

ना रुके तू कभी।


बस सोचती हो लगे

नैय्या मेरी पार।


माँ कैसे भूल जाऊँ

मेरे लिये तेरा प्यार।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract