प्रेम परिपूर्ण!
प्रेम परिपूर्ण!
शब्दों
में
पूर्णता
नहीं
होती
शब्द
में
अधूरेपन
है
अभिव्यक्ति
में
अपूर्णता
है
अनुभूति
में
पूर्णता
है
प्रेम
भाव
में
निहित
होता
है
आवाज
में
नहीं
भाव
पूर्ण
हीं
नहीं
परिपूर्ण
है
प्रेम
निहित
होता
है
रोम
में
आत्मा
में
धड़कन
में
दिल
में
प्रेम
सर्वव्यापी
है
अविनाशी
है।
