प्रेम बदलतेरहता है
प्रेम बदलतेरहता है
धोखा
जैसा
होता
है
प्रेम
कभी
कम
तो
कभी
ज्यादा
होता
रहता
है
प्रेम
अपना
कभी
पराया
सा
हो
जाता
है
प्रेम
एक
रंग
में
न
होकर
बहुरंगी
हो
जाता
है
प्रेम
बदरंगी
हो
जाता
है
प्रेम
प्रेम
सफेद
तो
कभी
रंगीन
हो
जाता
है
प्रेम
प्रेम
अपना
रूप
रंग
ढंग
पल
पल
बदलते
रहता
है
प्रेम
कभी
विश्वास
में
लेकर
धोखा
दे
देता
है
प्रेम
