पहचान की उडान
पहचान की उडान
नारी हूँ मैं,
ज्वाला से निकली चिंगारी हूँ मैं,
सम्मान की अधकारी हूं मैं।
रूप मेरे अनेक,
किंतु भाव सदैव रहा एक,
निस्सवार्थता का हूँ मैं प्रतीक !!
अपमान सहकर भी, उठने का साहस है मुझमे
सागर सी गहराई ,धरती सा धैर्य है मुझमे
असंभव को संभव करने का कौशल है मुझमे !!
स्मरण हमेशा रखना,
विवश मुझे न समझना ,
शिव की शक्ति का एहसास हमेशा रखना |
अनगिनत तारों के बीच ,खोज रही हूँ अपना अतीत
सम्मान जिसने ,किया उसकी हुई हर क्षण जीत
मुरलीधर की मुरली का, थी मैं ही संगीत |
ऐ पवन उस दिशा ले चलो ,
जहाँ मेरा अस्तित्व तिरस्कृत न हो ,
सुरक्षित भविष्य , क्षमतों को नई उड़ान दो |
