STORYMIRROR

vedika singh

Abstract

2  

vedika singh

Abstract

फासले

फासले

1 min
198

फासलों से अगर दिल की

दूरियों का पता लगता 

तो पास होकर भी 

दिलों में दूरियाँ ना होती,

ना होती कोलाहल में

खामोशियाँ,

और ना होती भीड़ भरी

राहों में तन्हाइयाँ।


कह पाती सब कुछ बेजान नज़रें भी,

ठहरा पानी भी बहुत कुछ कह जाता,

नहीं टूटती बोझल साँसें भी किसी 

निशब्द बांह पर,


यमुना तट पर फिर

कोई प्रेम के गीत गाता, 

फासलों से अगर दिल की

दूरियों का पता लगता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from vedika singh

फासले

फासले

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract