मुक्तक : मासूम सी जान
मुक्तक : मासूम सी जान
कभी आंखों से कभी जुल्फों से कभी होठों से वार करती हो
अपनी कातिल अदाओं से जाना हर पल बेकरार करती हो
तुम्हारी एक मुस्कुराहट से घायल है हमारी मासूम सी जान
फिर क्यूँ छुरियां चलाकर के दिल के टुकड़े हजार करती हो ।
