STORYMIRROR

Dilasha Dibyamayee Pradhan

Abstract

3  

Dilasha Dibyamayee Pradhan

Abstract

मोहब्बत की बददुआ

मोहब्बत की बददुआ

1 min
250

कहते है टूटे दिल की गुंज

दूर तक सुनाई पड़ती है

मगर आसमान का टूटा दिल

सबको दिखाई पड़ता है

वही टूटता तारा जो सबकी मुरादें पूरे करता है

बस अपने लिए बेबस और लाचार बन जाता है। 

बरसों से आसमान ने सिर्फ जमीन से प्यार किया है

पर सृष्टि कर्ता ने उन्हें सिर्फ फासला ही दिया है

न जाने उसने किस जनम में कौन सा गुनाह किया है।

टूटता तारा जलता है

रफ्तार से जमीन पर गिरता है

जमीन प्रेमी का संदेशा पाकर धन्य तो हो जाती है

लेकिन कभी उत्तर में तारा भेज नहीं पाती है

उत्तर के अपेक्षा में आसमान पर 

शाम से सुबह हो जाती है

हो न हो आसमान को

मोहब्बत की बददुआ लगी है


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract