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Dilasha Dibyamayee Pradhan

Abstract

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Dilasha Dibyamayee Pradhan

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मोहब्बत की बददुआ

मोहब्बत की बददुआ

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कहते है टूटे दिल की गुंज

दूर तक सुनाई पड़ती है

मगर आसमान का टूटा दिल

सबको दिखाई पड़ता है

वही टूटता तारा जो सबकी मुरादें पूरे करता है

बस अपने लिए बेबस और लाचार बन जाता है। 

बरसों से आसमान ने सिर्फ जमीन से प्यार किया है

पर सृष्टि कर्ता ने उन्हें सिर्फ फासला ही दिया है

न जाने उसने किस जनम में कौन सा गुनाह किया है।

टूटता तारा जलता है

रफ्तार से जमीन पर गिरता है

जमीन प्रेमी का संदेशा पाकर धन्य तो हो जाती है

लेकिन कभी उत्तर में तारा भेज नहीं पाती है

उत्तर के अपेक्षा में आसमान पर 

शाम से सुबह हो जाती है

हो न हो आसमान को

मोहब्बत की बददुआ लगी है


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