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Sipra Debnath

Abstract Action Inspirational

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Sipra Debnath

Abstract Action Inspirational

मंजिल तय करो

मंजिल तय करो

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बीच रास्ते में जब तुमने हाथ छोड़ दिए थे 

भीड़ में खो जाने के लिए,

मुझे मालूम पड़ गयी थी असल में आप मेरे कोई नहीं थे।

फिर मैं वहां से चलना शुरू कर दी

और आज मैं वही हूं जहां मुझे होनी चाहिए थी।

समय बताता है कि कोई किसी का अपना नहीं

मंजिल तय करो और आगे बढ़ते रहो

वक्त के साथ ही वहां पहुंच जाओगे।

उस दिन आंसुओं के घूंट पी गयी थी

आज होंठों पे मुस्कुराहट है।



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