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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

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महल और रहस्य

महल और रहस्य

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हर महल में सैकड़ों रहस्य दफन हैं 

यहां दबे हुए न जाने कितने कफन हैं 

न जाने कितनी प्रेम कहानियां बुनी गई 

कुछ दबी रह गई तो कुछ खूब सुनी गई 

राजा रानी के प्रेम की कहानियां मशहूर हैं 

राजाओं के भोग विलास के चर्चे जरूर हैं 

हर महल में कोई न कोई अनारकली मौन है

खून से सना ना हो, ऐसा महल कौन है 

कुछ राजकुमारियां प्रेमी के साथ चिनवाई गई 

कुछ रानियों की रास लीलाऐं भी यहां पाई गई 

अपनों के छल से छलनी यहां की दीवारें हैं 

विश्वासघात की नींव पर बनी ऊंची मीनारें हैं 

पन्ना धाय के त्याग से रोशन हर अहाता है

वो जौहर का कुंड वीरता की गाथा गाता है 

हर बुर्ज पर वीर सैनिकों की बलिदान गाथा है

कितने आक्रमण सहे, हर दरवाजा ये सुनाता है

खाई से भी गहरे यहां पर अनेक राज हैं 

हर शिल्प का बड़ा ही खूबसूरत अंदाज है

घने दरख्तों की तरह घने रहस्य छिपे हैं यहां

चंद सोने की मोहरों पर सेनापति बिके हैं यहां 

भोली भाली प्रजा पर अत्याचारों के गवाह हैं ये 

तानाशाही के बूट तले कुचले जाने के गुनाह हैं ये 

इतने रहस्य हैं कि कई ग्रंथ लिखे जा सकते हैं 

वो दौर पीछे छूट गया, अब आजादी मना सकते हैं।



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