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Disha Puri

Abstract Inspirational

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Disha Puri

Abstract Inspirational

मेरे जैसा कौन बनेगा ?

मेरे जैसा कौन बनेगा ?

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ना जाने क्यों मुझे एक तराजू में तोलते हो तुम, 

मुझे बदलने की नयी नयी वजह क्यों ढूँढ़ते हो तुम, 

लगता है तुम्हे, कई कमियाँ हैं ... मेरी शख्सियत में

मुझे तराशने की जुस्तजू में यूँ लगे हो तुम 


पर सवाल है मेरा, अगर मैं तुम जैसी बन भी गयी

तो मेरे जैसा कौन बनेगा ?

जब विधाता ने कलम उठायी होगी, 

तो तक़दीर तो मेरी भी लिखी होगी, 

जनम से मृत्यु तक की कोई, 

मेरी भी तो कहानी रची होगी


मिट्टी, आग और पानी की 

गुड़िया तो बस नहीं मैं

मेरे जहन में मेरे लिए, सिर्फ मेरे लिए

कई रचनाएँ उन्होंने रची होंगी 


भुला कर अपनी शख्सियत, अगर मैं बन भी गयी सोना 

तो भी मेरा सवाल है

अगर मैं तुम जैसी बन भी गयी

तो मेरे जैसा कौन बनेगा ?


अगर मैं तुम जैसी बन भी गयी

तो मेरे जैसा कौन बनेगा ? 


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