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RITUGOPAL SHARMA

Abstract

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RITUGOPAL SHARMA

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मैं भी न

मैं भी न

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उसने कानों में कहा

और फिर ओझल

दिखा नहीं कहने वाला

मैंने टटोले 

उसके स्पर्श के अंदाज़

सुना, जो उसने कहा

मिलाने लगी

एक- एक पल

अरे !

उभर आया मेरा चित्र

मैं भी

जाने ख़ुद से ही

कितनी - कितनी बातें कर लेती हूं।।।


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