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shubham rudra 01

Abstract

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shubham rudra 01

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मै हिंद का बेटा

मै हिंद का बेटा

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मैं हिंद का बेटा आज एक ऐलान करता हूं।

कसम लेता भारत की, हिंद का गान करता हूं।

काटना भी पड़ा यदि सर, तो विचलित तन नहीं होगा।

समर्पित देह मा मैं आज, अपनी तुमको करता हूं।।


नहीं परवाह घर की है, ना यादें अब सताती है।

तेरे आचल से भारत मां, महक मेरी मां की आती है।

धरम पहले तेरी रक्षा करना, हम हिंद के वीरों का।

मौत का ख्वाब नहीं अब तो, शहादत मन को भाती है।

          

बहुत अरमान था बचपन से, तेरी रक्षा का भारत मा।

सुनी थी शौर्य गाथा, हिंद के वीरों की भारत मा।

सजाएं थे सपने हमने, शौर्य इतिहास रचाने के।

वक्त है अब उसको संपूर्ण करने का, ये भारत मां।।


उठाकर सिर यदि अब, तुझसे कोई आंख लड़ाएगा 

 तेरा बेटा ये भारत मां, अब इसको सह ना पाएगा।

तनिक भी देर ना होगी, कलम सिर उसका करने में।

जेहादी अब किसी निर्दोष का, यदि खून बहायेगा.।।


सरहद पर प्रहरी बन कर मैं देश की रक्षा करता हूं।

गरमी सर्दी कुछ भी हो, मैं कर्म के को अपने करता हूं।

चाहे जितना दर्द हो मुझको पथ पर डटा रहूंगा मैंं।

इस हिंद की रक्षा में मैंं अपना सर्वस्य न्यौछावर करता हूं।         


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