STORYMIRROR

Sanjay Gupta

Abstract

4  

Sanjay Gupta

Abstract

माना कि

माना कि

1 min
230

माना कि

तू मेरे जिक्र में नहीं, पर

तू मेरे जेहन में है।


माना कि

तू मेरी बातों में नहीं, पर

तू मेरे खामोशी में है।


माना कि

तू मेरी हकीकत में नहीं, पर

तू मेरे ख्वाबों में है।


माना कि

तू किसी और कि अमानत है, पर

तू आज भी मेरे , पहले मोहब्बत में है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Sanjay Gupta

Similar hindi poem from Abstract