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Sanjay Gupta

Abstract

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Sanjay Gupta

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माना कि

माना कि

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माना कि

तू मेरे जिक्र में नहीं, पर

तू मेरे जेहन में है।


माना कि

तू मेरी बातों में नहीं, पर

तू मेरे खामोशी में है।


माना कि

तू मेरी हकीकत में नहीं, पर

तू मेरे ख्वाबों में है।


माना कि

तू किसी और कि अमानत है, पर

तू आज भी मेरे , पहले मोहब्बत में है।


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