STORYMIRROR

Gurdev Sohi

Inspirational

4  

Gurdev Sohi

Inspirational

माँ

माँ

1 min
303

ईश्वर का वरदान है माँ,

सब रिश्तों में महान है माँ।

जब जीवन का पाठ पढ़ाती माँ,

तब किताब बन जाती माँ।


कथनी में उसकी शिष्टाचार है,

कथनी में उसकी संस्कार है।

जब हर क्षण का अहसास कराती माँ,

तब समय बन जाती माँ।


जगने में उसके प्रभात है,

सोने में उसके रात है।

जब हर बिपता को हराती माँ,

तब हिमालय बन जाती माँ।


साहस उसका हथियार है,

ऊर्जा उसमें अपार हैं।

जब ममता का प्रकाश फैलाती माँ,

तब बाती बन जाती माँ।


दुख लेना उसको स्वीकार है,

सुख देना उसका सदाचार है।

जब खुशी के आँसू बहाती माँ, 

तब उत्सव बन जाती माँ।


दुआओ में उसके चमत्कार हैं,

प्रोत्साहन में उसके जय जयकार है।

जब खुद कम खाकर बच्चो को खिलाती माँ, 

तब गौरेया बन जाती माँ।


वात्सल्य प्रेम के उसमें भाव है,

समर्पण उसका स्वभाव है।

जब आगे बढ़ने का गीत सुनाती माँ,

तब नदी बन जाती माँ।


मर्यादत रहना उसका व्यवहार है |

सहनशीलता उसका उपहार है।

जब नि : स्वार्थ सेवा भाव जगाती माँ,

तब धरती बन जाती माँ।


केवल देने में उसका विस्तार है ,

चरणो में उसके स्वर्गद्वार है।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Gurdev Sohi

Similar hindi poem from Inspirational