माँ की परिभाषा मैं दूँ कैसे?
माँ की परिभाषा मैं दूँ कैसे?
मां की परिभाषा मैं दूँ कैसे
एक शब्द में कहूं मां तो वो है
स्वयं भगवान हों जैसे
माँ सृजनकृता है मां विघ्नहर्ता है
मां तुलसी जैसी पवित्र है
माँ सबसे अच्छी मित्र है
मां जैसा दूजा न कोई चरित्र है
माँ सारथी है जीवन रथ का
माँ मार्गदर्शक है हर पथ का
माँ वेदना है माँ करुणा है माँ ही मेरी वन्दना है
मां तो गंगाजल है मां खिलता हुआ कमल है
मां सफलता की कुंजी है माँ सबसे बड़ी पूंजी है
मां रिश्तो की डोर है बिन माँ तो रिश्ते कमजोर हैं
मां जैसा बहुमूल्य रिश्ता लोगों के पास है
पाने की चाहत में इतने अंधे हो गए हैं फिर भी वो उदास है
ईश्वर को धन्यवाद करो कि हमारी मां हमारे साथ है
आज मैंने जो कुछ भी पाया है
सर पर रहा हाथ सदा
हर पल रहा साथ मेरी मां का साया है
ज्योति वह शख्स है
जिसमें दिखता उसकी मां का अक्स है
माँ हमारे लिए पैसे जोड़ती है
मां हमारी खुशी के लिए अपने सपनों तक को तोड़ती है
माँ ने समर्पण भाव से निभाया है अपना फर्ज
सात जन्मो तक भी ना उतरेगा उनका कर्ज
जो कहते हैं मां मेरा तुमसे कोई वास्ता नहीं
याद रखना इस पृथ्वी पर आने का माँ के अलावा दूजा कोई रास्ता नहीं
जो आज भी अपनी मां से जुड़ा है
वह मां को कभी खुद से दूर ना करना क्योंकि मां के रूप में स्वयं मिला उन्हें खुदा है
मां बन कर रही मुसीबत में भी परछाई
मेरा जो अस्तित्व है इसमें दिखती है मेरी मां की सच्चाई
मां पूरी करती है हर ख्वाहिश
लगाकर अपनी इच्छाओं पर बंदिश
मां तो खूबसूरत सा रास्ता है
मां तो सच में फरिश्ता है...!!!!
