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Minarv Tyagi

Abstract

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Minarv Tyagi

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कठपुतली

कठपुतली

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कठपुतली सोचने लगी,

कब आज़ादी कि आएगी घड़ी। 

यह धागे कैसे कटेंगे,

उसके मन में यह चिंता जगी। 


थक गए गुलामी करके,

अब करेंगे कुछ हम हटके। 

अपनी आज़ादी खुद लाएँगे,

अब हम ना रुक पाएँगे।


अपने पैरो पर खुद चलेंगे,

अपने मन के रास्ते पर खड़े उतरेंगे।  


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