खुशी को खुशी की नजर लग गई
खुशी को खुशी की नजर लग गई
ऐ खुशी ?
कहां हो तुम ?
हो या नहीं ?
क्यों मेरी मुस्कान अब खुशी से नहीं दर्द से जुडी है
ख़ुशी ओ ख़ुशी
लौट आने का ख्याल नहीं है क्या ?
क्यूं तड़पा रही हो ऐसे जैसे कुछ साल पहले किसी और ने तड़पाया था ?
तब से गयब ही हो चुकी हो
कहां खोई रहती हो ?
ख़ुशी माफ़ कर दो मुझे
मैं किसी खुदगर्ज से नजदीकियां बढ़ाके तुमसे फासले बना रही थी
वो मुझे पता ही नहीं चला
उसके जंजीरों में बंधे के मैं मेरे मुस्कुराहट में कांटो की रेखा बना रही थी तुमसे मुह फिरा रही थी
इस्लिये रूठी हो क्या मुझसे ?
मुझे जरूरत है तेरी
इतनी भी नरजगी क्यू ?
मुझे मौका तो दो खुश होने का
मौका ?
तुझे पता भी है ? मैंने तेरे मस्कुराहत में कितनी बार खुशी घोलने की कोशिश की थी
जब तू मुझसे दूर हो रही थी फिर भी मैंने तेरा साथ नहीं चोरा था
तेरे जैसे किसी और के बहकावे में आके रास्ते नहीं बदल लिए थे
तुझे इल्म भी नहीं जब तेरे दिल में खंजर घोपे जाते थे
मैं भी रोई कार्ति थी
तेरे खुशी को तूने खुद छीन लिया है
नहीं वपस आएगी तेरी खुशी
क्यूं आउ मैं वपस ?
फिर से किसी और के लिए तेरे से छुट जाने के लिए ?
तुझे खुद भी पता है
तू अभी भी खुदको सम्हाल नहीं पाई है
तू दिल से खुश नहीं हो पायेगी क्योंकि अभी भी तेरे दिल में उसका ही गुलाब रखा हुआ है
मैं आउंगी जरूर आऊंगी जब तू खुद से इतना प्यार करेगा,तू पहले की तरह छोटी छोटी चीजों में मुझे ढूंढेगी तब
अब तू ये समझ तेरी खुशी को तेरी ही नज़र लग गई है रे
पहले खुद से मुलाकात करले
अभी के लिए अलविदा तुझे।
