STORYMIRROR

Kalpana Satpathy

Abstract Classics Fantasy

4  

Kalpana Satpathy

Abstract Classics Fantasy

ख़ुशी का रंग

ख़ुशी का रंग

1 min
30

फागुविज़ा सुबह की ओस है

 पतझड़ में, मंद-मंद हवा के कोमल स्पर्श में

 खुश रंगों के साथ विमान पर

 आओ और नाचो, जंगली औरत

 मेरे मन के मंदिर में, मेरे आँगन में।

 पंचरंगी होली अबीर के अंदाज में

 मेरे मन में खुशी का रंग भर रहा है

 भक्ति के रस से वेदी सजी हुई है

 मेरे आंसू मेरी आँखों में हैं

 जब तक चाहत है तुम आओगे

 घंटाघर के नीचे

 खोई हुई पनीर की तरह रेत

 मैं इसे मन में इतनी खुशी के साथ लूंगा।

 बरसात के मौसम के बाद

 और सौंफ के रंग में रंगा हुआ

 फॉगुर पर्स सजाकर

 सारे दुःख भूल जायेंगे

 यही कहा जाएगा कि खुशियों का रंग

यादों से भरा होता है

 तुम मेरे हृदय की ज्वाला को जानते हो

 मैं आपके चरणों में हो जाऊँगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract