खुली आंखों से बीजे सपने
खुली आंखों से बीजे सपने
उम्मीदों के मुहाने पर हमने बीजे कुछ सपने
बंद नहीं खुली आंखों से हमने बीजे कुछ सपने
मुट्ठी में आशाओं के अरमान लिए,
जीवन के लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए हमने सजाए कुछ सपने
मेहनत की कुंजी से परिश्रम की डोर को थामे
चलते थे कांटों पर जिंदगी की परेशानियों को दूर करने के लिए
आशाओं के पगडंडी पर सजने लगे उम्मीदों के पंख लिए उड़ने लगे हम लक्ष्य की ओर
सुखद एहसास लिए कल्पना की उड़ान से,
विजय शिखर के परचम पर लहराए, हमने सफलता के
सजीले सुनहरे प्रकाश पुंज
सपनों को सींचने में कभी अश्रु कभी स्वेद
आशाओं की कश्ती पर बैठकर लक्ष्य का किनारा मिलता है।
लक्ष्य अगर मजबूत हो तो, उसे पा लेना संभव होता है।
