STORYMIRROR

Priyanka Damare

Inspirational

4  

Priyanka Damare

Inspirational

ख़ूबसूरत सनम...

ख़ूबसूरत सनम...

1 min
271

दो अल्फाज मै भी वतन के बारे मे बचपन में सुना करती थी और

उन शहीदों को महसूस करके मेरी भी आखे आसुओ के बूंदों से भर जाती थी ।

इतिहास के कुछ पन्ने पलटाकर खुद से खुद में हौसला बढ़ाया करती थी

और मन में एक आंधी आया करती थी।

वो वतन जिसका आज भी अगर तिरंगा देखूं ना तो आसमां को भी आसमां दिखाई देता ।

पता नहीं क्यों? यह वतन का बेपनाह इश्क हर बार मन ही मन तड़पाता है

कुछ ना कुछ करने जाओ तो किसी मजबूरी में डाल देता है

तो फिर भी वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational