Nayan Bhavsar
Inspirational
पहले इंसान चिल्ला चिल्ला के थक जाता है
फिर भी उसकी कोई नही सुनता।
फिर वो इंसान उस मोड़ पे आके ठहरता है कि
उसकी खामोशी दुनिया के लिए शोर बन जाती है।
खामोशियाँ
जरुरी है उस बच्चे से लिपट जाना.. अपनी उस प्यारी परछाई में सिमट जाना. जरुरी है उस बच्चे से लिपट जाना.. अपनी उस प्यारी परछाई में सिमट जाना.
अब हर उस बात पर प्रतिक्रिया नहीं देती जो मुझे चिंतित करती है। अब हर उस बात पर प्रतिक्रिया नहीं देती जो मुझे चिंतित करती है।
प्रेम की ज्योति से तन मन के सब तिमिर हटायें , प्रेम की ज्योति से तन मन के सब तिमिर हटायें ,
दूर नजरों से बेशक होते हैं बच्चे, पर आंखें उनका करती हर पल इंतजार है। दूर नजरों से बेशक होते हैं बच्चे, पर आंखें उनका करती हर पल इंतजार है।
हृदय में राम स्थापित कर चलो दीप जलाएँ। हृदय में राम स्थापित कर चलो दीप जलाएँ।
प्रभात की किरणों में, सपना समाहित, सूरज की मुस्कान से, जीवन है प्रेरित। प्रभात की किरणों में, सपना समाहित, सूरज की मुस्कान से, जीवन है प्रेरित।
मंजिल की तलाश में हूँ, मैं थका नहीं हूँ, बस सुस्ता रहा हूँ। मंजिल की तलाश में हूँ, मैं थका नहीं हूँ, बस सुस्ता रहा हूँ।
त्यौहारों के इस मौसम में कोन अपना कोन पराया यह परिचय करवाता हूं। त्यौहारों के इस मौसम में कोन अपना कोन पराया यह परिचय करवाता हूं।
किसी शहर में एक जौहरी रहता था, उसकी असमय मृत्यु हो गई। किसी शहर में एक जौहरी रहता था, उसकी असमय मृत्यु हो गई।
शब्द या शब्दों का क्या? शब्दों की बड़ी अजब गजब माया है। शब्द या शब्दों का क्या? शब्दों की बड़ी अजब गजब माया है।
जब कभी न दिवाली पे घर जा पाएं तब अकेले दिवाली कैसे मनाएं। जब कभी न दिवाली पे घर जा पाएं तब अकेले दिवाली कैसे मनाएं।
यह ज़मीं है सबका बसेरा, सबको इस पर बसने दो। यह ज़मीं है सबका बसेरा, सबको इस पर बसने दो।
नारी अपने आप में भारी है.. हर जगह पहुंच जाती है.. घर में हो या बाहर.. सब जगह अपना। नारी अपने आप में भारी है.. हर जगह पहुंच जाती है.. घर में हो या बाहर.. सब जगह ...
आओ जिन्हें भुलाने विसराने का प्रयास किया,उस महामानव को कोटि- कोटि नमन करें. आओ जिन्हें भुलाने विसराने का प्रयास किया,उस महामानव को कोटि- कोटि नमन करें.
सोचें देखा ना पत्नी ने, चल दिए कुछ दूर जब पहुँच गए दोनों । सोचें देखा ना पत्नी ने, चल दिए कुछ दूर जब पहुँच गए दोनों ।
पच पर्वों का पांचवा त्यौहार भाई दूज है उसका नाम। पच पर्वों का पांचवा त्यौहार भाई दूज है उसका नाम।
मिल जाएगी मंजिल, भटकते भटकते, गुमराह तो वो लोग हैं, जो घर से निकले ही नहीं। मिल जाएगी मंजिल, भटकते भटकते, गुमराह तो वो लोग हैं, जो घर से निकले ही नहीं।
यदि मान लो कुम्हार को ईश्वर और चाक को सृष्टि, यदि मान लो कुम्हार को ईश्वर और चाक को सृष्टि,
जो बीत गया वो लौट कर नहीं आएगा और कल क्या होगा ये भी तो कोई नहीं जानता। जो बीत गया वो लौट कर नहीं आएगा और कल क्या होगा ये भी तो कोई नहीं जानता।
मेरा दिल एक महल के साथ साथ एक झोपड़ी में भी दीपक जल पाये तभी प्रसन्न होता है। मेरा दिल एक महल के साथ साथ एक झोपड़ी में भी दीपक जल पाये तभी प्रसन्न होत...