STORYMIRROR

GAURAV AGRAWAL

Abstract Inspirational

4  

GAURAV AGRAWAL

Abstract Inspirational

खामोशियाँ

खामोशियाँ

1 min
253

चारो ओर फैली गहरी लंबी खामोशियाँ

मन में विचारों के तूफान उठाती खामोशियाँ


जिंदगी क्या है क्यों है उसकी मंजिल क्या है


कामयाबी की अंधी दौड से लगता है, एक अंतहीन मृगतृष्णा है

और, थोडा और पाने की चाह से लगता है,

एक अनबुझी प्यास है


आखिर कैसे आ पहुँची जिंदगी इस पड़ाव पर ?


घबरा मत ऐ दोस्त मेरे,

कुछ वक्त बचा है अभी भी..

चल लौटा लें इसे उस पुराने मोड पर


उस मासूम हँसी, उन खिलखिलाते पलों को जी लें एक बार दोबारा

कि खामोशियाँ भी कह उठें, किससे पाला पड़ा था हमारा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract