STORYMIRROR

Shalu Mishra

Abstract

3  

Shalu Mishra

Abstract

जीवन

जीवन

1 min
316

अ राही तू आया 

क्यूँ इस जग में।

ले जान अभी

इसी क्षण में।


मानस जीवन

में आसां नही

चले आना।

अहो भाग हुए

इस जन्म को 

तुमने पाया।


फल की चाह छोड़

कर्म अनूठे कर 

डालो।

निडर केसरी सा

पथ पर तुम 

चालो।


निराधार ही

तुम वापस ना 

चले जाना।

अपनी अमिट 

छाप छोड़ के 

ही जाना।


तुरंग सा चलकर

चमकना हेम सा।

तुम खिलकर 

प्रसून रुपी जीवन

का सार समझना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract