युवा साहित्यकार
ऐसा मीठा सा ख्वाब रोज इन अँखियों में चला आता है। ऐसा मीठा सा ख्वाब रोज इन अँखियों में चला आता है।
तुम खिलकर प्रसून रुपी जीवन का सार समझना। तुम खिलकर प्रसून रुपी जीवन का सार समझना।
दिल से करती हूँ हमेशा नतमस्तक तुम्हें नमन। दिल से करती हूँ हमेशा नतमस्तक तुम्हें नमन।