STORYMIRROR

Asfia Khatoon

Abstract

2  

Asfia Khatoon

Abstract

गृहस्थ गीता

गृहस्थ गीता

1 min
424

आतिथ्य घर का वैभव है

समझौता घर का सुख है।


पयार घर की प्रतिष्ठा है

व्यवस्था घर की शोभा है।


सिर पर कर्ज हो जाय

इतना व्यय मत करो।


पाप हो ऐसा कमाओ नहीं

चिंता हो वैसा जिओ नहीं।


रोग हो ऐसी खाओ नहीं

क्लेश हो ऐसा बोलो नहीं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract