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Gaurav Sharma

Abstract

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Gaurav Sharma

Abstract

God

God

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उनके चरणों में अर्पित होने वाले

मैं दीप हजार हों जाऊं या

उन्हें छूने वाली ठंडी बहार हों जाऊं


बस एक ही तमन्ना है मेरी इस जिंदगी में,

कि तीर्थ स्थल जाकर वहीं का बजार हो जाऊं 

उनकी आंखों में जो रहता है हर पल,

मैं वो खुमार हों जाऊं


या मीरा की ही तरह उनके भक्तों में मैं भी शुमार हो जाऊं

ज्यादा कुछ नहीं बस उनके गले का हार हो जाऊं

और मेरे रोज़ पहनने के लिए अपने हाथों से छुए मुझे,

बस इतने में तो मैं भवसागर पार हों जाऊं।


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