एक नया सफर
एक नया सफर
चलती हूँ हर रोज़
नये सफर की ओर
थक जाती हूँ , रुक जाती हूँ
सहे जाती हूँ सांसो की डोर
मृगतृष्णा के आयाम बहुत
दिखते हैं चारों ओर
आशाओं की रवानी में
रोज़ की इसी कहानी में
खींचता कोई अपनी ओर
मन आकर्षित होता
कानों में उभरता शोर
रोक नही पाता तब
चल पड़ती हूँ उस ओर
पहुंचती हूँ जब मंजिल पर
सोचती क्यों आई इस छोर
वहाँ मै और मेरी परछाई
परछाई देखती मेरी ओर
मानो पूछती प्रश्न
कितना मुझे थकाओगे
कितना मुझे चलाओगे
मुझे चाहिए ठोर
साथी ढूंढो कोई और
तुम दीवाने पगले हो
तुम्हारे खत्म ना होंगे दौर
फिर कह दोगे चलता हूं
फिर नए सफर की ओर
नये सफर की ओर
थक जाती हूँ , रुक जाती हूँ
सहेजाती हूँ सांसो की डोर
मृगतृष्णा के आयाम बहुत
दिखते हैं चारों ओर
आशाओं की रवानी में
रोज़ की इसी कहानी में
खींचता कोई अपनी ओर
मन आकर्षित होता
कानों में उभरता शोर
रोक नही पाता तब
चल पड़ती हूँ उस ओर
पहुंचती हूँ जब मंजिल पर
सोचती क्यों आई इस छोर
वहाँ मै और मेरी परछाई
परछाई देखती मेरी ओर
मानो पूछती प्रश्न
कितना मुझे थकाओगे
कितना मुझे चलाओगे
मुझे चाहिए ठोर
साथी ढूंढो कोई और
तुम दीवाने पगले हो
तुम्हारे खत्म ना होंगे दौर
फिर कह दोगे चलता हूं
फिर नए सफर की ओर
