एक हूँ
एक हूँ
अती ख्याल का हक़दार, चुम्नीय, मगन और अंजान वो एक
चिंतन उनका, उम्मीद कल का वो सपनों का अवतार वो एक
आनंद उमाडो, अमर्ष कार, डर से चालक विवश्कार वो एक
कअतिड़ी निगरानी आस पास, बनो, बिगडो अपने हाथ वो एक
तोल का परीक्षा देता, जामिया कमिया को सुनता वो एक
क्रोध भी आता, उम्मीदें जोड़ मजबूत भी बनता वो एक
गिरता जमीन पर धुल स्वाद जान फिर उठता वो एक
दो प्रयास जीत नही, प्रयासों पर ही जीतता वो एक
रहो पर अनुपस्थित वो, कानों का लेते सहारा वो एक
खड़े कान श्रोता जीतते,वो श्रोता अक्सर हारा वो एक
उम्मीद ही सब कुछ नही, तो आगे और जीवन है एक
शोकमुक्त हूँ पल से,जो करोडो जन में से वो एक
हार मानकर,ताने सुनकर रहता उन सब में से एक हूँ
जीत से दहाड़,हार-मौन तोड़ता,उन सब में से एक हूँ
अनंत स्वप्न के आसबोझ,वाहक उन सब में से एक हूँ
तुम्हें बता रहा हूँ, जीवन अनमोल जिसमे में अनेक हूँ।
