एक एहसास
एक एहसास
क्यों आंखे हैं आज नम,
क्यों सांसे गई सी थम,
ये हवाएँ, ये नीला आसमा,
दूर कहीं ढलता सूरज और अँधेरा,
वो अंधेरा एक नए शुरुआत की,
एक नई सुबह, एक नई किरण की,
वो हवा सी थी, बह चली,
एक फूल सी, एक कली,
वो आखे कहीं गुम सी गई,
दो हंसी के पल, एक मुस्कान दे गई,
बस एक कहानी थी वो ऐसे,
एक मधुर गीत हो जैसे,
क्यूं खाली सा लगे आज ये मन,
बस मैं, तनहाई और अकेलापन,
क्यों आंखे है आज नम,
क्यों सांसे गइ सी थम।
