anuradha nazeer
Inspirational
माफ करना चाहिए गलती को
हर रात के बाद एक नया दिन !
कोई
इन चीजों को र...
ज़िन्दगी का क...
प्यार दो
मूल्यवान
जीत
अपने काम से प...
सफलता
प्यार प्यार प...
प्यार की प्या...
आज आठ दशक और हो गया है नौवें में प्रवेश। आज आठ दशक और हो गया है नौवें में प्रवेश।
निजी ज़िन्दगी से लेकर सामाजिक ज़िन्दगी तक , हर नयी दिशा के साथ 'बवाल ' मचना जुड़ा है। निजी ज़िन्दगी से लेकर सामाजिक ज़िन्दगी तक , हर नयी दिशा के साथ 'बवाल ' मचना जुड़ा...
अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी
हां मैं वहीं हिन्दुस्तान हूं, मैं हर एक फौजी की जान हूं। हां मैं वहीं हिन्दुस्तान हूं, मैं हर एक फौजी की जान हूं।
प्रथम प्रणाम उन मात-पिता को, जिन्होंने मुझको जन्म दिया। प्रथम प्रणाम उन मात-पिता को, जिन्होंने मुझको जन्म दिया।
अदम्य साहस धैर्य भुजबल, भारत माता के सपूत। अदम्य साहस धैर्य भुजबल, भारत माता के सपूत।
जिद ही है जिन्दगी जिन्दगी के मायने तो अभी से क्यूँ नहीं चल काशवी जिद कर और पूरी क जिद ही है जिन्दगी जिन्दगी के मायने तो अभी से क्यूँ नहीं चल काशवी ज...
पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में। पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में।
उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ही तो मेरी जागीर है।.... उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ह...
उसकी एक अलग ही खुशी मिलती है जहाँ पर मैंने अपनी रचनाएँ लिखी स्टोरिमिरर पर। उसकी एक अलग ही खुशी मिलती है जहाँ पर मैंने अपनी रचनाएँ लिखी स्टोरिमिरर पर।
मन में है विश्वास पूरा है विश्वास यह जुनून सिर चढ़ बोलेगा। मन में है विश्वास पूरा है विश्वास यह जुनून सिर चढ़ बोलेगा।
तुझसे ही तो प्रेरणा पाता है समाज, ज़िंदा है ज़िन्दगी, हे मज़दूर महान। तुझसे ही तो प्रेरणा पाता है समाज, ज़िंदा है ज़िन्दगी, हे मज़दूर महान।
एक भाषा बोली, समझी जाए जरूरत थी आन पड़ी अंग्रेजों ने विदेशी शिक्षा का प्रसार बड़ा किया एक भाषा बोली, समझी जाए जरूरत थी आन पड़ी अंग्रेजों ने विदेशी शिक्षा का प्रसार ...
खुशी के हर पल बिखरे कभी लोरी, कभी आंख-मिचोली में खुशी के हर पल बिखरे कभी लोरी, कभी आंख-मिचोली में
हिन्दी भाषा में अथाह कोष के, सजीव दर्शन दे जाता है। हिन्दी भाषा में अथाह कोष के, सजीव दर्शन दे जाता है।
पहिये की भांति वक्त, चलता रहता है, झुकाता है जग को,स्वयं नहीं झुकता है। पहिये की भांति वक्त, चलता रहता है, झुकाता है जग को,स्वयं नहीं झुकता है।
जीवन पथ पर चला पथिक ना जाने तू किधर चला। जीवन पथ पर चला पथिक ना जाने तू किधर चला।
“अपना हाथ जगन्नाथ”, बूझ लो तुम इस बात का सार। “अपना हाथ जगन्नाथ”, बूझ लो तुम इस बात का सार।
खेलते तो सभी हैं ताश, करते रहते हैं अपना मनोरंजन। खेलते तो सभी हैं ताश, करते रहते हैं अपना मनोरंजन।
जी ठीक समझा आपने, वो मेरे पिता थे। जी ठीक समझा आपने, वो मेरे पिता थे।