चौपाई -उपहार
चौपाई -उपहार
चौपाई - उपहार ********** उपहारों की लीला न्यारी। होते जाते सब बलिहारी।। जाने कैसा समय है आया। उपहारों की अद्भुत माया।। बिना स्वार्थ उपहार न मिलता। देने वाला देकर जलता।। चक्कर चलता सस्ता महंगा। मुफ्त मिले कुर्ता या लहंगा।। अपनों का अब ठाँव नहीं है। दौरे रिश्ता कहीं -कहीं है।। उपहारों की मारा-मारी।। कितने हल्के कितने भारी।। उपहारों का खेल खेलना। वैसे पापड़ आप बेलना।। उपहारों का बाँटो दोना। चाँदी पीतल या फिर सोना।। यह तो है कलयुग की माया। रंग धूप की बदले छाया।। आज बड़े उपहारी देवा। खाओ मुफ्त मिठाई मेवा।। सुधीर श्रीवास्तव
