चौपाई - सोना
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सोना या फिर सोना लोगे।
भाव बताओ किसको दोगे।।
सोना कहीं पड़े ना भारी।।
दे जाये कोई बीमारी।।
सुबह देर तक हम सोते हैं।
अपने दुश्मन खुद होते हैं।।
निजी स्वास्थ्य को खुद खोते हैं।
जीवन पथ काँटे बोते हैं।।
सोने में मत समय गँवाओ।
खुद का दुश्मन नहीं बनाओ।।
भोर किरण का लाभ उठाओ।
सुखदा भाव, समृद्धि पाओ।।
नहीं देर तक हमको सोना।
वरना रोज पड़ेगा रोना।।
सोना काम नहीं आयेगा।
इक दिन दुश्मन बन जायेगा।।
बहुत जरुरी माना सोना।
पर इसके पीछे है रोना।।
सही समय पर सोना सीखो।
उठो भोर में मत तुम चीखो।।
आखिर सोना कहाँ रुकेगा।
या फिर इसका भाव गिरेगा।।
निशदिन आँखें दिखा रहा है।
आम जनों को रुला रहा है।।
क्या सोना है छलने वाला।
या है इसके दिल कुछ काला।।
सावधान इससे रहना है।
कवि सुधीर का यह कहना है।।
सुधीर श्रीवास्तव