STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract Inspirational

3  

Sudhir Srivastava

Abstract Inspirational

चार दिन की जिंदगी

चार दिन की जिंदगी

1 min
391

जिंदगी सिर्फ चार दिन की है

इसका जी भर कर लुत्फ उठाइये

प्रेम, सद्भाव, भाईचारा बढ़ाइए

औरों के जितना भी 

काम आ सकें, बेहतर है

रोते, मुरझाए चेहरों पर

मुस्कान ला सकें बेहतर है।

कौन जाने किस घड़ी 

बुझ जाये अपना ये दीया

अच्छा है कुछ खास 

कर जाएं तो बेहतर है।

राग द्वेष निंदा नफरत में

न उलझाएं खुद को,

सबके हितों की खातिर

खुद को उलझाएं तो बेहतर है।

चार दिन की जिंदगी में

हम नया इतिहास रचें

औरों के दिलों में उतर पायें तो बेहतर है।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract