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Chandar Prakash

Abstract

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Chandar Prakash

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भारत देश

भारत देश

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स्वतंत्रता का नित करूं प्राक्षालन, भारत अखंड बने तब चैन मिले

शहीदों की स्वर्णिम विरासत अक्षुण्ण रखूंगा,चाहे अंबर और अवनि हिले

मुझे नहीं स्वर्ग जाकर मोक्ष पाना,बस माॅ॑ भारती की चरण धूलि माथे लगाना

तिरंगा रहे कफ़न, गोदी में माॅ॑ की सोना, सदा भारत का गुणगान गाना


तिरंगा हमारी शान है, झुकने न दूंगा इसे जब तक प्राणों में जान है

श्वांस श्वांस में खुशबू उसीकी, रक्त मे बह रहा मान का अरमान है

पर धर्म जाति पंथ प्रांत भाषा भेद, अभी भी देश में अनेक हैं

माॅ॑ भारती के शरीर पर दिख रहे, अभी भी गहरे घाव अनेक हैं


भारत माता की देख दशा, दुःख से हमारे नयन सजल हैं

कोटि-कोटि पुत्रों के होते,अब तक माता क्यों विकल हैं

है आज चुनौती हम पुत्रों को!

देखें किसमें कितनी निष्ठायें राष्ट्र प्रेम की अविचल हैं?


आओ बोलो एक माॅ॑ के पूत सभी हम, धर्म बस हम एक देश हैं

द्वेष ईर्ष्या मुक्त हो प्रेम से रहें सभी हम,हम सब एक परिवेश हैं

पथ सुगम पर चलती दुनियां,हम दुर्गम पथ हैं सुगम बनाते

मंजिल हमारे चरण चूमने आती, हम मंजिल के पास न जाते


जागो ज़ोरावर, फतेहसिंह, रानी गाइदिनल्यू,तंगतुरी प्रकाशम जागो

जागो शिवा सुब्रमण्यम, त्याग वीर हेम बरुआ, खुदीराम, ऊधमसिंह जागो

जागो मंगल, मनु, तात्या जागो, आजाद, भगत, विसमिल अशफाक, अब्दुल हमीद जागो

जागो माता तुम्हें पुकार रही सोये सिंह अब जागो


जागो पुरु के पौरुष, जागो चंद्रगुप्त बलशाली

आज मौन निमंत्रण तुम्हें दे रही, तक्षशिला, अवंतिका, वैशाली

भूल न जाना नालंदा,मगध के खंडहर,राणा शिवा की ललकारें

शौर्य पराक्रम का अरुणोदय कर, राष्ट्र में भर दो अरुणिम लाली


राष्ट्र हों प्राण हमारे, राष्ट्र ही आराध्य हो, राष्ट्र ही सर्वस्व हो.......

साधना, कर्तव्य, कर्म, धर्म पर बस राष्ट्र धर्म का वर्चस्व हो.......

स्वतंत्रता का नित करूं प्राक्षालन, भारत अखंड बने तब चैन मिले.......

शहीदों की स्वर्णिम विरासत अक्षुण्ण रखूंगा, चाहे अंबर और अवनि हिले...... 


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