STORYMIRROR

Parminder Soni

Inspirational

3  

Parminder Soni

Inspirational

अंतहीन

अंतहीन

1 min
246

आज घर बैठ चलो कुछ सुन्दर रचते हैं

व्यस्त अंधेरों में गुमी रिश्तों की

दमक ले आते हैं

आओ बैठें आराम से चाय की चुस्की लें

आँखें मूँदें मेज़ पर पैर टिका लें

कहीं जाने की नहाने की झट से भागने की

कोई जल्दी नहीं


गहरी साँस लें आओ पास, संग रहें आओ,

दिल खोल दें सुख दुख टटोल लें

खामोशियों को चीर कुछ अल्फाज़ बोल दें

कोई धुन बुने कुछ बोल गुनगुनाएं

त्राहि त्राहि करते संसार में

चल दो पल वीणा के तार बजाऐं

अनिश्चितता की इस धुंध में

रौशन इक नज़्म करें है कल अनिश्चित

तो आओ, हर लम्हा अनमोल,

और आज को अंतहीन करें।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational