ऐसे होगे तुम
ऐसे होगे तुम
मैं जानती हूँ।
तुम नही बदल पाओगे
मेरा अतीत और भविष्य
पर रहोगे मेरे साथ हर एक क्षण।
मैं जानती हूँ।
तुम नही रोक पाओगे
मेरे कदमों को जीवन की
कठिनाइयों में डगमगाने से
परन्तु दोगे अपना हाथ
मुझे सभलने के लिए।
मैं जानती हूँ।
तुम्हारे पास मेरी हर
मुश्किल का हल नहीं होगा
फिर भी तुम सुनोगे
मेरी सारी मुश्किलों को और
कोई न कोई तरकीब जरूर निकालोगे
हाँ..मैं यह भी जानती हूँ।
तुम नही बचा पाओगे
मुझे टूटने से
लेकिन मेरे पास होगे
हर बार सहारा देने के लिए
और फिर से जोड़ने को।
मैं अभी नही जानती कौन हो तुम?
पर तुम होगे वही
जिसे मेरी कद्र होगी
उत्साह, उमंग और बिना किसी शर्त के
जियोगे मेरे साथ।

