आखिर क्यों ?
आखिर क्यों ?
अगर हम जिंदा है तो मर मर कर जिए क्यों ?
जीतने की अगर चाह है तोछोटी छोटी हार से डरे क्यों ?
अगर जन्नत को ही जमीन पर उतार लाना है तो
मेहनत करने मे कमी क्यों ?
कश्ती को किनारा पहुचाना ही है तो लहरोंसे डर क्यों ?
जिंदगी हमे मात दे कर तराशना चाहती है तो रोके क्यों ?
हर मात से हम निखर रहे हैं तो गम क्यों ?
हर मुश्किल को मात देना अगर मुमकीन है तो, थमे हो क्यों ?
जिंदगी को एक सुंदर मोड देना है तो
देनेमे झिझक क्यों ?
