आजादी आसान नहीं थी !
आजादी आसान नहीं थी !
आजादी आसान नहीं थी, शेरों ने बलिदान दिया है,
गुलामी से झुके थे जो सिर, जीने का अभिमान दिया है।
पता उन्हें था मिट जायेंगे, वो देश की आन बचाने में,
मिटा के अपनी हस्ती हमको, आजादी का मान दिया है।।
देश की आजादी की खातिर, सीने पर गोली खाई थी,
साहस इतना था उनमें, हर दुश्मन को धूल चटाई थी।
गद्दारों की गद्दारी की, कीमत तो उन्होंने चुकाना था,
झूल गए फांसी पर वो, पर वतन पे आंच न आई थी।।
अपना सब कुछ लुटा दिया, हमको सम्मान दिलाने में,
भूल गए हम उनको आज, अपना ही नाम बढ़ाने में।
नेताओं ने भुला दिया सब, कुर्सी का खेल निराला था,
वीरों का बलिदान भुलाकर, लगे थे कुर्सी बचाने में।।
समय आ गया है जागो, वीरों को सम्मान दिलाने का,
जिस पहचान के हकदार है वो, वो पहचान दिलाने का।
राष्ट्र की खातिर मिटने वाले, वीरों पर अभिमान करो,
लगा दो अपनी सारी ताकत, उनको सम्मान दिलाने में।
