Meenu Pammer

Inspirational


4.7  

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सीधी बात -एक आधारस्तंभ

सीधी बात -एक आधारस्तंभ

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सोनालिका (सोनू ) स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के पश्चात् नौकरी की तलाश में थीं ! परन्तु हर माँ बाप की तरह उसके माता पिता की भी यही इच्छा थी कि उसका घर बस जाए ! “पम्मी बुआ पूछ रही थी कितने बरस की हो गई है सोनू ? उनके चाचा ससुर ने एक लड़के का रिश्ता भेजा है तुम्हारे लिए !” माता जी बोलीं !“बता रही थीं कि उसका परिवार तो इसी शहर में रहता है परन्तु लड़का अखिलेश मुंबई की किसी बड़ी कंपनी में नौकरी करता है और उसके परिवार वाले कहते हैं हमें दहेज़ में कुछ नहीं चाहिए ! “

“नहीं माँ ! मुझे अभी शादी की कोई जल्दी नहीं है ! नौकरी कर के अपने पैरों पर खड़ा तो होने दो !” सोनालिका ने जवाब दिया ! 

“ऐसे रिश्ते क्या बार बार हमारे दरवाज़े पर दस्तक देंगे ? शादी तो एक ना एक दिन करनी ही है ! तुम आज कल के लड़के लड़कियाँ बस 

नौकरी की होड़ में लगे रहते हो ! शादी का सही समय कब निकल जाता है हाथ से , पता ही नहीं चलता “ ! माता जी बोलती रहीं !


अगले इतवार को दोनों परिवारों का मिलना तय हुआ ! बिचौलिये की उपस्थिति में दोनों परिवारों ने एक दूसरे से शादी के बारे में बातें की व अपनी अपनी 

सहमति जताई ! उस दिन सोनालिका व् अखिलेश वहाँ मौज़ूद नहीं थे ! परन्तु सोनालिका ने अखिलेश से अकेले में मिलने की इच्छा व्यक्त की !पुराने

ख्यालात वाले पिताजी ने जवाब दिया ” जब हम बड़ों ने बातचीत कर ही ली है तो तुम्हारी इस मुलाकात की क्या आवश्यकता है “ ?

"जिस के साथ पूरा जीवन बिताना है, उससे एक बार रूबरू होना भी तो ज़रूरी है " ! सोनालिका बोली !

उसकी बात पर हामी भरते हुए सोनू के पिताजी ने इस बारे में फ़ोन पर लड़के के पिताजी से बात की तो उन्होंने कहा 

" मुझे कोई आपत्ति नहीं है ! अगले सप्ताह अखिलेश मुंबई से यहाँ आएगा तो अगले दिन वो दोनों मिल सकते हैं ! “

सहमी हुई सोनू के मन में एक बात उथल पुथल मचा रही थी कि जो बात अखिलेश को पता होनी चाहिए वह उसे और उसके परिवार को पता भी

है कि नहीं !गंतव्य स्थान पर जब सोनू पहुँची तो अखिलेश पहले से वहां उपस्थित था ! दोनों में बातचीत शुरू हुई !  

सोनालिका बोली , " आप को या आपके परिवार को हमारे ऐसे मिलने से कोई आपत्ति तो नहीं थी ?"

"अरे नहीं! नहीं ! बल्कि मेरी भी यही इच्छा थी कि होने वाले जीवनसाथी को शादी से पहले एक बार मिलकर खुलकर बात करनी चाहिए ! " अखिलेश ने जवाब दिया !

"मैं उम्मीद करती हूँ कि बिचौलिये ने मेरी नौकरी करने की इच्छा के बारे में आपको व आपके परिवार को बता दिया होगा ? "

"अच्छा ? हमेँ इस बारे में कुछ नहीं पता !" अखिलेश ने हैरानीजनक स्वर में जवाब दिया !!

"दरअसल मैंने पुलिस की नौकरी के लिए परीक्षा दी है ! यदि मैं परीक्षा उत्तीर्ण कर जाती हूँ ,तो मैं पुलिस-कर्मी की नौकरी करने की इच्छा रखती हूँ ! परन्तु आप समझ सकते हैं कि पुलिस में भर्ती के बाद ऐसा हो सकता है कि मैं आपके साथ मुंबई में ना रह सकूँ , हमें अलग अलग रहना पड़ सकता है !”

"मैं आपसे खुल कर सीधी बात करना चाहती थी ! क्योंकि मैं मानती हूँ कि एक नए रिश्ते की शुरुआत सीधी बात ,स्पष्टता व पारदर्शिता से होनी चाहिए ! यही एक मुख्य कारण है आपसे आज मिलने का ! " सोनालिका ने अपनी बात खत्म की !

उसकी बातें सुनकर पहले तो एक झलक अखिलेश ने सोनालिका की ओर मुस्कुराते हुए देखा और फिर कहा - 

"आपकी बातों में व्यक्त स्पष्टता ,ईमानदारी व् पारदर्शिता की मैं प्रशंसा करता हूँ ! मुझे यह जानकर अच्छा लगा कि आप आत्म-निर्भर बनना चाहती हैं ! आज के   दौर में यह आवश्यक भी है ! मुझे आपके इस फैसले से कोई आपत्ति नहीं परन्तु मैं अपने माता पिता से पहले इस बारे में बात करना चाहूँगा , उनकी सहमति बहुत ज़रूरी है मेरे लिए ! ”  अखिलेश ने अपनी बात पूरी की !

अगले दिन ही सोनालिका के घर के फ़ोन पर घंटी बजी ! फ़ोन पर अखिलेश के पिताजी थे ! सोनू के पिताजी ने उनके साथ बात करके फ़ोन रखते हुए कहा

" हमारे समधीजी को अपनी होने वाली बहु के नौकरी करने से कोई आपत्ति नहीं है ! "

उसकी बात सुनकर सोनू मन ही मन फूले नहीं समा रही थी !दो सप्ताह बाद शादी का शुभ मुहूर्त निकला और अखिलेश व सोनालिका की शादी संपन्न हो गई !ऐसे लग रहा था मानो सीधी बात व् पारदर्शिता से आरम्भ हुए नव जीवन में सोनू भगवान का पुन: पुन: धन्यवाद करती नहीं थक रही थी !


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