क्यूं परेशान है आज सभी ?
क्यूं परेशान है आज सभी ?
नम हैं आज आंखें सबकी
बरसों से एक ही ज़िन्दगी जीके
आज निराश हैं हम भी
रोज़ उठके अब किसी नकामियाबियत का डर नहीं है
बस हर सुबह ज़िंदा रहने के खुशगुजार हैं सभी
ज़रा सोचो कहा भागे जा रहे थे
क्या हासिल करना चाहते थे
क्या रुक गया है
और क्या शुरू करना बाकी है
सोचो क्यूंकि अब समय काफ़ी है |
मत चिंता करो की ये सब ख़त्म होने के बाद
सब पहले जैसा रहेगा की नहीं
क्यूंकि जब यहां आय थे तब कोई तैयारी नहीं थी
और जब जाओ तो बस एक विश्वास हो
की हर चुनौती योजना से नहीं जीती जाती
और हर मुसीबत दरवाज़ा नहीं खटखटाती
जब कुछ वर्षों बाद पीछे मुड़ेंगे
याद करेंगे
पीठ थपथपाएंगे
किस्से सुनाएंगे
और फक्र से
खुद को गले लगाएंगे
तो यकीन हो जाएगा कि कितनी बड़ी जंग थी
और हम कितने साधारण सैनिक
हा बॉर्डर नहीं था
पर जीते तो हम थे
घर की दहलीज थी
और हम घर के अंदर थे।
