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Puja

Drama Inspirational Others

4  

Puja

Drama Inspirational Others

विडम्बना

विडम्बना

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आज सुबह जब फ़ोन पे सासु माँ से बात हो रही थी तो उन्होंने ज़िक्र किया की वो अपने छोटी बेटी यानि मेरी छोटी ननद के यहाँ जाकर कुछ दिन रहना चाहती है जो अपने पति के साथ उनके कार्यालय के स्टाफ क्वार्टर में रहती है । बातें करते वक़्त वो बता रही थी की घर में उनका मन नहीं लग रहा  वहां जाकर कुछ दिन रहेंगी तो शायद उनका मन बहल जायेगा ऐसा उन्हें लगता है । बात करते ही मुझे कुछ दिन पहले भेजी गयी एक रील की याद आ गयी जिसमे एक ढोंगी कार्टून बाबा एक लड़की- जिसे अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास था, जो अपने माता पिता का ख्याल रखना चाहती थी अपने भाइयों के बराबर- उससे कह रहे थे की अभी से तुम्हारी ऐसी सोच है तो ससुराल मे पांव टिकेंगे तुम्हारे माँ बाप की ज़िम्मेदारी भाइयों पर छोड़ दो और जब लड़की ने कहा की कई बार भाई ख्याल नहीं रखते तो ढोंगी बाबा ने कहा सास की सेवा करो  तुम्हारा पति भी किसी का भाई है उसे भी ऐसा लगता हो तो ठीक लगेगा वो लड़की तो चुप हो गयी पाखंडी की बात सुनके पर वो ये नहीं कह पायी की मुझे भी मेरे माता पिता ने पाल-पोष कर बड़ा किया है मुझे निवाले खिलाते वक़्त मेरे माता पिता ने यह नहीं देखा की ये लड़की है ये तो ससुराल चली जाएगी हमें तो हमारा बेटा देखेगा उसे दो निवाले ज्यादा खिलाते है माँ बाप ने मुझे पढ़ाते वक़्त तकलीफ की तिनका तिनका जोड़ के जब पैसे दिए तो ये नहीं देखा की हमारे पैसे तो इस पर बर्बाद हो रहे इसे ससुराल वाले ही पढ़ाये लिखाये काबिल बनाये उन्होंने तो मुझे भी उतनी ही आजादी दी , मेरे लिए भी उतनी ही तकलीफें उठायी जितना मेरे भाइयों के भविष्य के लिए और कितनी आसानी से ऐसे पाखंडी बाबा सुना देते है सास की सेवा करो माता पिता को पूछो ही  मत और हमारे पति हमें ऐसी रील्स भेजते है  क्यूंकि उन्हें लगता है की हम अपने माँ बाप के प्रति थोड़ा चिंता रखते है कि वो ठीक रहे इसलिए नहीं की हम अपनी सास की सेवा नहीं करते बल्कि इसलिए क्यूंकि इन्हे लगता है सास की सेवा करना मतलब अपने मॉं-बाप को भूल जाना और परवाह न करना। 

मतलब २५-२६ साल से जो माँ बाप ने आपको पहचान दी संस्कार दिए जिसकी वजह से इन्हे सेवा मिल रही है उन्हें ही भूल जाएँ हम और इन्हें याद रखे जो हमारा ख्याल अपने मूड और आराम के हिसाब से रखते है ये तब हमारे साथ रहते है  जब हम पूरी तरह इनके इशारों पर चलते है और हम चलने भी लगते है ताकि घर में कलेश न हो ये सोच कर  और आज मैंने महसूस किया की पति की बात और ढोंगी बाबाजी की बात तो बिलकुल सही है चिंता और ध्यान तो मायके के तरफ उन लड़कियों का होता है जो घर छोड़कर ससुराल आती है उनका थोड़ी जिनके ससुराल का मतलब सिर्फ पति होता है और पति के कार्यक्षेत्र में अपने मायकेवालों को साथ ही बसा ले उनका ध्यान क्यों जायेगा मायके की तरफ और ये लोग ससुराल के लोगो को चाहे जितनी जरुरत क्यों न हो साथ नहीं रखते और विडम्बना तो ये है की हमारे पति और सास इन्हे न  कोई ज्ञान देते है  और न ही इन्हे ऐसी रील्स भेजते है और कुछ दिनों में मेरे पति और सासु माँ बड़ी ननद के यहाँ शिफ्ट होंगे जो अपने पति के साथ रहती है सिर्फ, जी हाँ बिल्कुल काम के सिलसिले में ही पर वो उस शहर नहीं शिफ्ट होंगे जिस शहर में मेरा मायका है भल ही वो मेरे कार्यक्षेत्र से कितनी ही दूर ही क्यों न हो और मुझे तबादला लेकर कहीं दूर जहाँ से मैं बिल्कुल दूर हो जाऊँ और मेरी सासु माँ अपने बेटियों के करीब रह सकें। 

अब इस दोहरे चरित्र पर गुस्सा नहीं आता पर एक तंज भरी मुस्कान आ जाती है क्यूंकि जान चुकी हूँ और मान भी चुकी हूँ कि ये बदलने वाला नहीं है- हाँ मैं कोशिश करके देख चुकी हूँ। 



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