स्वपन
स्वपन
काम से लौट कर जब मधुरिमा घर वापस आई तो घर का दरवाजा खुला था उसे अजीब तो लगा फिर भी उसने मुस्कान को आवाज़ लगाई और उसने देखा कि उसके घर मे बहुत सन्नाटा है।वो घर के अंदर गई तो उसने पाया कि कुछ तो गड़बड़ है यूँ तो उसकी बहन चहकते हुए उसके पास आ जाती थी पुरे दिन की कहानी उसे दरवाजे पर खड़े-खड़े एक सांस में सुना डालती थी पर आज पुकारने पर भी जब वह नही आई मधुरिमा के दिल की धड़कन बढ़ने लगी और उसे कुछ अनिष्ट होने की आशंका होने लगी फिर भी उसने अपने मन को समझाया और मुस्कान के कमरे की तरफ बड़ी कमरे के अंदर जाकर देखा तो ये क्या मुस्कान का शव जमीन पर बेजान पड़ा था मधुरिमा के पैरों तले मानो ज़मीन खिसक गई उसे कुछ समझ आता कि क्या हो रहा है तभी उसका फ़ोन बजा जैसे ही उसने अपना फ़ोन देखा तो आकाश का फ़ोन था आकाश मधुरिमा के आफिस में उसके साथ काम करता था मधुरिमा ने रोते-रोते फ़ोन उठाया और आकाश को सब बताया आकाश में मधुरिमा को ढांढस बंधाया और कहा कि जब तक मै वंहा पहुँचता हूँ तुम पुलिस को इत्तिला करो आकाश का फ़ोन काटते ही मधुरिमा ने पुलिस को कॉल किआ ओर वो मुस्कान के शव से लिपट कर रोने लगी कुछ ही देर में पुलिस भी आ गई और आकाश भी। पुलिस ने अपनी तहकीकात शुरू कर दी सब बहुत हैरान थे क्योंकि, मुस्कान के शरीर पर कोई चोट के निशान नही थे और न ही कोइ सुराख कि जिससे लगे मुस्कान ने आत्महत्या की हो। आखिर मुस्कान की मौत हुई कैसे और क्यों? इसी बात का पता लगाने के लिए मुस्कान के शव को एम्बुलेंस में डालकर अस्पताल पहुँचाया गया। छान-बिन के दौरान पुलिस को मुस्कान के कमरे से कोई सुराख नही मिला सिवाए एक मणि के। ये मणि मेने पहले कभी नही देखी मधुरिमा ने पुलिस को बताया। वो मणि बहुत ही आकर्षक थी। उसकी रोशनी इतनी तेज थी कि उसकी चमक से मधुरिमा चक्कर खाकर बेहोश हो गई तभी किसी की आवाज़ से उसकी बेहोशी टूटती है और वो आवाज़ होती है मुस्कान की जो उसे यह कहकर जगा रही होती है कि दीदी उठो वरना आफिस के लिए देर हो जाएगी। मधुरिमा को कुछ समझ नही आ रहा होता है कि ये सब क्या हो रहा है वो मुस्कान को कस कर गले लगा लेती है और उससे कहती है कि भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि तुम ठीक हो, तो मुस्कान हँस कर बोलती है मुझे क्या हुआ दीदी? बीमार तो आप थे लगता है कल का बुखार सिर पर चढ़ गया है आपके, फिर मुस्कान उसे समझती है कि कल आप जब आफिस से वापस आये थे तो आपको तेज़ बुखार था तो मैने आपको दवाई देकर सुला दिया था और आप अब तक सो रहे हो तो मैने आपको जगा दिया अब आपका बुखार कम है पर फिर भी आप आज छुट्टी ले लो तब तक में आपके लिए नाश्ता बना देती हूँ मधुरिमा ने हामी में सिर हिलाया और वो उठ कर मुस्कान के कमरे में गई तो उसने देखा कि वही मणि जो उसे शायद सपने में दिखी थी वो उसी जगह पड़ी हुई है जिसे देखकर मधुरिमा ज़ोर-ज़ोर से मुस्कान-मुस्कान चिल्लाने लगी उसकी चिल्लाने की आवाज़ सुनकर आकाश उसके पास आता है और मधुरिमा को समझने की कोशिश करता है कि मुस्कान मर चुकी है अब वो कभी वापस नही आएगी पर मधुरिमा गुस्से में आकाश को थप्पड़ मार देती है और कहती है कि मुस्कान ज़िंदा है उसने ही आज मुझे नींद से जगाया कल मुझे बुखार था तो में दवाई खाकर सो गई थी तब आकाश उसे समझता है कि तुम सो नही रही थी तुम कोमा में थी पिछले 6 महीनों से आज तुम जागी हो मधुरिमा को कुछ समझ नही आ रहा था उसने दरवाजे के पास देखा तो मुस्कान अब भी मुस्कुरा रही थी...
