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Neha Nupur

Drama

3  

Neha Nupur

Drama

शादी से पहले ख़त तुम्हारे नाम

शादी से पहले ख़त तुम्हारे नाम

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सुनो!

किसी तरह बस यादें सँजोना चाह रही हूँ। ऐसा लगता है सब खत्म होने वाला है। सब रिश्ता, सारा अपनापन खत्म होने वाला है। मैं जैसे मेहमान हूँ एक बस। क्यों ये सब सोच रही, पता नहीं, पर मैं खुद को कहीं बाँट नहीं पा रही। किसीसे कुछ कह नहीं पा रही। सबको देखती हूँ तो बस देखती रहती हूँ। जैसे आखिरी पल हो ये सब।

ये आखिरी मौसम उनके साथ बीत रहे हों। जैसे मरने के पहले ख़्याल आते हैं, वैसा ही हो रहा। झूठी खुशियों के झूठी हंसी ठिठोली कर रही। बस कैसे भी कुछ पल चुरा लूँ। कुछ याद रहने लायक रहे मेरे साथ। एक एक करके सबसे मन भरता जा रहा, मन खुद को अलग कर रहा सबसे।

विरक्ति हो गयी है हर चीज़ से। कभी बहुत से सपने हिलोर मारते हैं मन में और अगले ही पल जैसे सुनामी आती है और सब तबाह। सिर्फ त्राहिमान वाला मंज़र दिखता है। हर खुशी-हर ग़म-हर दुःख में सिर्फ मैं हूँ अकेली। दिखते तो सभी हैं, पर मन नहीं दिखता किसी का।

मुझे अपनी माँ, अपने पापा, मौसी, छोटे पा का खुश चेहरा देखे हुए जाने कितने दिन हुए। दादी को जब देखती हूँ लगता है ये आखिरी बार देख रही।

बाबा को देखती हूँ तो सोचती हूँ और कितनी शिकायतें लेके जाऊँगी इनके नाम की,

अब उनसे कोई शिकायत भी नहीं रही। किसीसे भी कोई शिकायत नहीं रही मुझे। बस मैं खुश होना चाहती हूँ। मुझे लगता है मैं इसी सुकून की तलाश में मारी जाऊँगी कभी। 


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