रक्षाबंधन का उपहार
रक्षाबंधन का उपहार
बाहर रिसेप्शन पर बैठे हुए अंजलि ने एक बार धीरे से पूछा “कितनी देर लगेगी ?”
रिसेप्शन पर बैठी हुई लड़की ने बिना उसकी ओर देखे हुए ही जवाब दिया “मैडम जल्दी हो जायेगा” फिर अंजलि की ओर मुड़कर बोली “आज रक्षाबंधन है इसलिए भीड़ कम है और सभी लोग त्यौहार मना रहे हैं, आप ने आज का दिन ही क्यों चुना ?”
अबकी अंजलि ने उसकी तरफ देख कर सिर्फ मुस्कुरा दिया और फिर धीरे से अपने पति संजय का हाथ अपने हाथ में ले कर आँख बंद कर ली I
अंजलि की आँखों के आगे सब कुछ नाच रहा था जैसे वो सब कुछ अभी घट रहा हो I
लगभग पांच वर्ष पहले की बात थी जब अंजलि की बेटी प्रिया तीन वर्ष की थी और वो रक्षाबंधन के दिन मचल गयी थी कि उसको भी अपने भाई को राखी बांधनी है I दरअसल अंजलि ने ही प्रिया को बताया था की वो लोग उसकी नानी के यहाँ जायेंगे और वहां वो अपने ममेरे भाई को राखी बांधेगी I लेकिन संजय की ऑफिस की व्यस्तताओं के चलते वो लोग जा नहीं पाए और अब प्रिया राखी बांधने के लिए मचल गयी थी I इसी उधेड़बुन में उसने प्रिया को मनाने के लिए ऑनलाइन पेस्ट्री मंगवा ली थी I पेस्ट्री लाने वाले ने घंटी बजायी तो अंजलि के पीछे पीछे प्रिया ने भी भईया कह कर दौड़ लगा दी I बाहर पेस्ट्री लेकर एक अठारह उनीस साल का लड़का आया था I दरवाजा खुलते ही अंजलि से पहले प्रिया ने भईया कह कर अपनी राखी लहरा दी I पेस्ट्री लेकर आया लड़का विनय ये देख कर पहले तो हैरान हुआ फिर अपना हाथ बढ़ाते हुए बोला “आओ बहना राखी बांध दो” I ड्राइंग रूम में बैठे संजय ने ये देख कर विनय को अन्दर बुला लिया और फिर प्रिया ने उसके हाँथ में राखी बांध दी और बड़े प्यार से उसको मीठा खिलाया और बोली मेरा गिफ्ट I विनय ने पेस्ट्री उसके हाँथ में रख दी और बोला “ये रहा” I गिफ्ट पाकर प्रिया अंजलि के साथ अन्दर चली गयी और संजय ने विनय को देने के लिए पैसे निकाले तो विनय ने पैसे लेने से मना कर दिया I इसके बाद भी कभी कभी विनय ऑनलाइन आर्डर ले कर आ जाता था और प्रिया से मिल जाता था I कुछ दिन बाद विनय ने बताया कि उसकी नौकरी दूसरी कंपनी में लग गयी है और अब वो ऑनलाइन आर्डर ले कर नहीं आएगा I परन्तु फिर भी विनय कभी कभी प्रिया से मिलने आ जाता था लेकिन एक बात जो ख़ास थी वो ये कि इतने वर्षों में कभी भी वो रक्षाबंधन के दिन आना नहीं भूला I अभी दो महीने पहले ही वो रक्षाबंधन के दिन आया था उस दिन उसकी तबियत कुछ ख़राब लग रही थी तो अंजलि ने पूछा था तो उसने बताया कि उसने टेस्ट कराया है और कुछ दिन में रिपोर्ट आएगी I इसके बाद वो प्रिया से मिल कर चला गया था I दो हफ्ते पहले एक डॉक्टर का फ़ोन आया था कि विनय की तबियत बहुत ख़राब है और वो आप लोगों से मिलना चाहता है खासकर के प्रिया से I पूछने पर डॉक्टर ने बताया की पैसे के अभाव में विनय का इलाज़ नहीं हो पाया और उसकी तबियत बिगड़ गयी I संजय और अंजलि को लगा कि विनय कहीं पैसे मांगने के लिए तो नहीं मिलना चाहता है I इस कारण उन दोनों ने निश्चय किया कि वो लोग अभी नहीं जायेंगे और देखते हैं अगर विनय या उसके डॉक्टर का दुबारा कोई फ़ोन आता है I उनकी आशा के अनुरूप चार पांच दिन बाद डॉक्टर का फ़ोन आया और उसने बताया कि विनय अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन वो प्रिया के नाम एक ख़त छोड़ गया है उसको लेने उनको आना पड़ेगा I
उस दिन संजय और अंजलि को थोडा बुरा लगा की वो लोग विनय के आखरी वक़्त में प्रिया को उससे मिला नहीं पाए लेकिन फिर उन्होंने सोचा की क्या हुआ ऐसे तो जीवन में बहुत लोग मिलते हैं कहाँ तक सबके पीछे भागा जा सकता है I
अगले दिन फिर डॉक्टर का फ़ोन आया कि संजय और अंजलि का आना जरूरी है I मन मार कर दोनों लोग प्रिया के साथ अस्पताल पंहुचे तो देखा डॉक्टर उनका इंतज़ार कर रहे थे I डॉक्टर ने उनको विनय का एक ख़त दिया, एक कागज़ और दिया और फिर उनसे कहा “विनय बहुत नेक लड़का था, आप लोग डॉक्टर निशांत से मिल लीजिये वो आप को आगे का सब प्रोसीजर बता देंगे”
आज अंजलि , संजय और प्रिया दुबारा डॉ निशांत के पास आये थे I इतने में रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने अंजलि से कहा “मैडम डॉ निशांत आपको अन्दर बुला रहे हैं”
अन्दर जा कर संजय और अंजलि ने देखा की प्रिया अपनी आँखें बंद कर के खड़ी थी, अंजलि नें अपने हाथ में पकड़ी विनय की तस्वीर उसके सामने कर दी और बोली “बेटा हम चाहते हैं की अपने जीवन में इन नयी आँखों से तुम सबसे पहले उस देवता के दर्शन करो जिसने तुमसे खून का रिश्ता न होते हुए भी जीते जी तुमसे अपने रिश्ते का बहुत मान रखा और दुनिया से जाने के बाद भी तुम्हारे जीवन में रौशनी भर दी”
इसके बाद अंजलि डॉ निशांत की तरफ पलटी और बोली “डॉक्टर साहब ये आँखें प्रिया के बड़े भाई की तरफ से प्रिया को दिया गया अनमोल तोहफा है इसीलिए मैंने आज का दिन चुना था, हमारी वजह से आप लोगों को जो तकलीफ हुई उसके लिए हमें माफ़ कर दीजिये और हमें भी फॉर्म दे दीजिये मैं और संजय भी नेत्रदान, नहीं - नहीं नेत्र उपहार देना चाहते हैं”
