रहस्यमयी जंगल का खौफ
रहस्यमयी जंगल का खौफ
सूरज ढल चुका था। शाम के धुंधलके में जंगल और भी डरावना लग रहा था। राघव और उसकी दोस्त माया ने सुना था कि इस जंगल में एक रहस्यमयी शक्ति है जो लोगों को गायब कर देती है। पर दोनों दोस्तों ने ठान लिया था कि वे इस रहस्य को सुलझाकर रहेंगे। राघव और माया जंगल में अंदर बढ़ते गए। हर तरफ अजीब-अजीब आवाजें आ रही थीं। पेड़ों की सरसराहट, जंगली जानवरों की गुर्राहट और अजीब सी गूंजती आवाजें। माया ने राघव का हाथ कसकर पकड़ा हुआ था। "राघव, हमें वापस चलना चाहिए," माया ने कहा। "यहां कुछ तो गलत है।" राघव ने अपनी टॉर्च की रोशनी और तेज कर दी। "बस थोड़ा और, माया। हमें पता लगाना है कि आखिर इस जंगल का रहस्य क्या है।" जैसे ही वे और आगे बढ़े, उन्हें एक पुराना और टूटा-फूटा मंदिर दिखा। मंदिर के दरवाजे पर अजीब से चिन्ह बने हुए थे। राघव ने दरवाजा खोला और अंदर की ओर कदम बढ़ाया। अचानक, मंदिर के अंदर से एक भयानक आवाज आई, "कौन हैं तुम लोग? यहाँ क्या कर रहे हो?" राघव और माया सहम गए। उन्होंने देखा कि एक बुजुर्ग साधु वहां खड़ा था, जिसकी आँखें चमक रही थीं। "हम... हम इस जंगल के रहस्य को जानना चाहते हैं," राघव ने हिम्मत करके कहा। साधु ने जोर से हँसते हुए कहा, "यहाँ से वापस चले जाओ, नहीं तो तुम भी उसी रहस्य का हिस्सा बन जाओगे।" पर राघव और माया नहीं माने। उन्होंने साधु से और सवाल किए। साधु ने उन्हें बताया कि यह जंगल एक शापित स्थान है, जहां बुरी आत्माएं रहती हैं। जो भी इस जंगल में आता है, उसे ये आत्माएं अपनी कैद में ले लेती हैं। माया ने राघव का हाथ खींचते हुए कहा, "राघव, हमें यहां से तुरंत निकलना चाहिए।" पर तभी, एक जोरदार तूफान उठा और दोनों दोस्तों को मंदिर के अंदर खींच लिया। वे दोनों बेहोश हो गए। जब राघव और माया को होश आया, तो वे एक अंधेरी और ठंडी गुफा में थे। उनके सामने वही साधु खड़ा था। "मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी," उसने कहा। "अब तुम इस जंगल के रहस्य का हिस्सा बन चुके हो।" राघव और माया ने एक-दूसरे को देखा और समझ गए कि अब वे इस जंगल से कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे। वे रहस्यमयी जंगल का खौफ बनकर वहीं कैद हो गए। और इस तरह, राघव और माया की कहानी भी उस जंगल के रहस्यों में हमेशा के लिए दफन हो गई।
